Monday, February 8, 2016


अमित शाह : अध्यक्ष के नाते उल्लेखनीय योगदान!


जब हमारी आदत विषयों पर “अतिसाधारण सोच-विचार” की पड़ जाती है, तो उसमें एक प्रकार की जड़ता आ जाती है। हमें जो सामने दिखायी देता है, हम उसके आगे नहीं देख पाते है। फलस्वरूप संदर्भित विषय का गहराई से विश्लेषण नहीं हो पाता है और निहित अर्थों को समझने में भी हम असमर्थ रहते है।

अमित शाह जी के दोबारा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर जो न्यूज रिपोर्टिंग हुई और जो सम्पादकीय टिप्पणियाँ लिखी गयीं, उनमें भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। बेशक, वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सबसे निकटतम और विश्वस्त व्यक्ति हैं। परंतु ‘अतिसाधारीकरण’ से वशीभूत होकर अनेक राजनैतिक विश्लेषकों ने शाह के योगदान की अनदेखी की है। विगत 18 महीने के उनके अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान उन्होंने पार्टी को आगे बढ़ाने में जो श्रेष्ठ काम किया है, वह इतना उल्लेखनीय है कि उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। उनका संक्षिप्त “प्रथम कार्यकाल” महत्वपूर्ण मानने के प्रमुख कारण हैं :-

1. मोदी और शाह ने मिलकर सफलतापूर्वक यह सुनिश्चित किया कि सत्ता में आने के बाद पार्टी व संगठन का महत्व कम न हो। आज सरकार और संगठन के बीच पूर्ण समन्वय है। इसका प्रमुख कारण दोनों के बीच का आपसी गहन संवाद और परिपक्व पारस्परिक सहयोग है। विगत 18 माह में यह बात आदर्श रूप से देखने को मिली। प्रधानमंत्री जी स्वयं नियमित रूप से पार्टी के मुख्यालय पर जाकर राष्ट्रीय तथा विकास के कार्यक्रमों में पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हैं और इसी वजह से सभी जगह सुदृढ़ नेतृत्व स्पष्ट दिखायी दे रहा है।

इस तरह का सुदृढ़ राजनैतिक नेतृत्व राष्ट्र के लिये बहुत जरूरी है। हमने यह बखूबी देखा है कि कांग्रेस के शासनकाल के समय में उनके कुछ प्रसिद्ध प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में किस तरह “पार्टी-संगठन” उनकी निजी संस्था हो जाती थी। पूरे देश ने यह देखा था कि कांग्रेस पार्टी के एक उपाध्यक्ष ने किस तरह लोगों के बीच मंच से अपनी छवि बनाने के लिये अपनी ही सरकार के विधेयक को सार्वजनिक रूप से फाड़कर फेंक दिया था

2. चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में लगातार जीत हासिल करके तथा झारखण्ड, महाराष्ट्र व हरियाणा में भाजपा की सरकार बनवाकर अमित शाह ने अपनी पार्टी के राजनीतिक जनाधार को और बढ़ाया है। जम्मू-कश्मीर में भाजपा की भागीदारी वाली सरकार का बनना एक ऐतिहासिक व अभूतपूर्व उपलब्धि है। पार्टी के लोग जानते हैं कि इसके लिये अमित शाह ने कितने “दृढ़-संकल्प” और कर्मठता के साथ काम किया है।

3. पार्टी कार्यकर्ताओं में “राष्ट्र-प्रथम” का भाव मजबूत करने के लिये शाह ने बहुत कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से तीन रचनात्मक कार्यों में संलग्न होने के लिये प्रेरित किया। इनमें कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए “बेटी बचाओ” और स्कूलों में कन्याओं के “ड्रॉप-आउट” कम करने तथा गंगा को स्वच्छ बनाने के लिये चलाये जा रहे “नमामि गंगा प्रोजेक्ट” ही नहीं, अपितु किसी भी जिले की एक नदी को स्वच्छ बनाने में भागीदार होने और सिर पर मैला ढोने वाले लोगों के पुनर्वास के लिये काम करना शामिल हैं।

एक कार्यक्रम में उन्होंने कार्यकर्ताओं को भी स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में लोगों को कार्यकर्ताओं के रूप में नामांकित करने का काम पार्टी को चुनाव जिताने की ‘मशीन’ में बदलना नहीं है। भाजपा इस मशीन के लिये नहीं, बल्कि ‘मिशन’ राजनीति के लिये है। भाजपा ऐसी राजनीति के लिये,जिसका उद्देश्य लोगों की सेवा करना है। पार्टी की सदस्यता को 10 करोड़ से अधिक करके और पूरे देश में कम समय में त्रिस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न करके उन्होंने अद्भुत उपलब्धि हासिल की है।

4. पार्टी संगठन के रणनीतिक विस्तार में भी उनकी उपलब्धियाँ महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने हमेशा उन राज्यों पर फोकस किया, जिन्हें हम "कोरोमण्डल राज्य'' कहते हैं। इनमें केरल, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडीसा और पश्चिम बंगाल तथा केन्द्र शासित प्रदेश पुदुचेरी भी शामिल हैं। वह इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि पर्याप्त जनादेश पाने के लिये भाजपा को हिन्दीभाषी क्षेत्र से आगे जाकर काम करना होगा।

5. उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में भाजपा की पहुँच बढ़ाने के लिये भी महत्वपूर्ण काम किये। भविष्य की संभावनाओं के प्रति हमेशा सजग रहने वाले शाह ने पार्टी संगठन में “ओबीसी मोर्चा” के रूप में एक और अनुषांगिक संगठन जोड़ा। वह अच्छी तरह जानते हैं कि पार्टी को अपना जनादेश बढ़ाने के लिये अन्य पिछड़ा वर्गों के बीच मजबूत आधार बनाना होगा।

6. राजनैतिक विश्लेषकों द्वारा पार्टी की कार्य-प्रणाली को संस्थागत स्वरूप देने के लिये उनके द्वारा किये गये प्रयासों की भी अनदेखी की गयी है। सच यह है कि पहली बार उन्होंने पार्टी कार्य के लिये 18 विभाग गठित किये हैं, जिन्हें स्पष्ट रूप से “परिभाषित” कार्य सौंपे गये हैं। इसमें अनेक गैर-पारम्परिक विभाग शामिल हैं जैसे- नीति, शोध, ई-लायब्रेरी, दस्तावेजीकरण और कार्यालय आधुनिकीकरण। प्रत्येक जिले में पार्टी के स्वामित्व वाला कार्यालय उनका सपना है और वह इसे हकीकत में बदलने के लिये लगातार काम कर रहे हैं।



सरकार और संगठन के बीच मजबूत संबंध, भाजपा का चुनावी विस्तार, भाजपा कार्यकर्ताओं में ध्येयशीलता का विकास, भाजपा के रणनीतिक विस्तार के लिये कार्य, सामाजिक क्षेत्र में कार्यों का दायरा बढ़ाना और पार्टी के कार्य को अधिक संस्थागत व व्यवस्थित स्वरूप देना शाह की प्रमुख 6 उपलब्धियाँ हैं।

राजनीतिक पंडितों और विश्लेषकों को याद रखना चाहिये कि शाह की इस सांगठनिक व राजनैतिक कार्यकुशलता की बदौलत ही उन्हें पार्टी का पुनः अध्यक्ष बनने का अवसर मिला है।



1 comment:

  1. आदरणीय विनय जी , आपके विचार अति सुक्ष्म स्तर पर बिल्कुल प्रायोगिक हैं . इस समझ को विस्तारित एवं व्यवहारिक तौर पर विकसित करने के लिए साधुवाद. आपके विचारों से हम ऐसे ही लाभान्वित होते रहे . यही आशा है.

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